Wednesday, March 8, 2017

Hum Kahan Ja Rahe Hain

साल के 364 दिन ज़ुल्म, और सिर्फ़ 1 दिन सोशल मीडिया पर महिला दिवस का दिखावा — क्या यही है असली सम्मान? समाज की दोहरी सोच पर एक करारा सवाल।


364 दिन महिलाओं पर ज़ुल्म करने वाले लोग,

आज 1 दिन फेसबुक, व्हाट्सएप्प पर चिल्ला-चिल्ला कर महिला दिवस मना रहे हैं, 

ना जाने हम कहाँ जा रहे हैं,


बेटियों को मार रहे कोख में, 

और बेटों के पैदा होने पर जश्न मना रहे हैं, 

ना जाने हम कहाँ जा रहे हैं,


जहाँ एक तरफ साक्षी, सिंधु, साइना, सानिया की जीत का जश्न मना रहे हैं, 

पर अपनी बहू-बेटी के घर से बाहर निकलने में भी ऐतराज़ जता रहे हैं, 

ना जाने हम कहाँ जा रहे हैं,

अपनी बहन को कोई आँख उठा कर देख भी ले तो खून खौल उठता है, 

और दूसरों की माँ-बहनों को एसिड से जला रहे हैं, 

ना जाने हम कहाँ जा रहे हैं,


अपने बेटों को इंच भर तकलीफ भी हो तो दर्द होता है, 

पर अपनी ही बहुओं को दिन भर ताने सुना रहे हैं, 

ना जाने हम कहाँ जा रहे हैं,


लड़के आधी रात में भी सड़कों पर लड़की छेड़ आएं तो भी शरीफ़ हैं, 

पर लड़की के थोड़े से छोटे कपड़े देख कर उसका कैरेक्टर ढीला बता रहे हैं, 

ना जाने हम कहाँ जा रहे हैं,


घरों में सुख-समृद्धि, खुशियाँ लाती हैं औरतें, 

पर चंद रुपयों के लिए उन्हें भी जिंदा जला रहे हैं, 

ना जाने हम कहाँ जा रहे हैं,


एक पल में झाँसी की रानी तो अगले ही पल में सती सावित्री है औरत, 

अगर मौका मिले तो प्रतिभा पाटिल बन पूरा देश चला सकती है औरत, 

ये सब कुछ जान कर भी जो अंजान बने जा रहे हैं, 

ना जाने हम कहाँ जा रहे हैं, ना जाने हम.....


                                    ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Wednesday, February 1, 2017

Pyaar Kya Hai

प्यार सिर्फ एक एहसास नहीं, बल्कि माँ का दुलार, भाई-बहन का रिश्ता और सैनिक के इंतज़ार जैसा भी होता है। प्यार की गहरी परिभाषा तलाशती एक कविता।


“प्यार क्या है..?”


प्यार तपस्या और साधना की अनुभूति है,
प्यार समंदर से मिलने वाला मोती है,

प्यार राधा है, रुक्मिणी है, शेषनाग है,
प्यार गोकुल की गलियों में कान्हा का रास है,

प्यार शबरी के बेर और मीरा का विश्वास है,
प्यार कैकेयी के कह देने पर राम का वनवास है,

प्यार माँ का बेटे से दुलार है,
प्यार पिता का दिया अतुलित संसार है,

प्यार भाई की कलाई पर बहन की राखी है,
प्यार गलती न होने पर भी माँगी गई माफ़ी है,

प्यार दादी की बनाई मक्के की रोटी, सरसों का साग है,
प्यार बड़े-बुजुर्गों का दिया आशीर्वाद है,

प्यार देश की सीमा पर लड़ रहे सैनिक के लिए किया इंतज़ार है,
प्यार पत्नी का पति के लिए किया गया श्रृंगार है,

प्यार आँखों ही आँखों में की हुई बातें हैं,
प्यार विरह में बितायी गई लंबी रातें हैं,

प्यार स्त्री के मस्तक पर लगा सिंदूर है, टीका है, लाली है,
प्यार कानों में पहनी हुई बाली है,

प्यार पायल है, बिछिया है, साड़ी है,
प्यार घूँघट में बैठी हुई घराड़ी है,

प्यार छोटी-मोटी नोक-झोंक और मीठी सी लड़ाई है,
प्यार प्रेमिका की गोद में सर रख ली हुई अंगड़ाई है,

प्यार एक दूजे के लिए खाई कसमें हैं, वादे हैं,
प्यार दिलों में जगते नेक इरादे हैं,

प्यार कभी पूर्णिमा तो कभी अमावस की रात है,
प्यार करवाचौथ पर किया हुआ उपवास है,

प्यार जैसे दिया और बाती का साथ है,
प्यार जन्म-जन्म के लिए माँगा हमसफ़र का हाथ है,

प्यार शुरुआत है, प्यार ही अंत है, 

प्यार से ही यह सृष्टि और प्यार ही अनंत है


प्यार जीवन की अनमोल पूँजी है,
प्यार ही तो सफलताओं की कुंजी है।

                                             ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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