Thursday, September 18, 2014

Engineering Life – Funny College Kavita | Kirtish Shrotriya

मैगी-समोसे पर दिन गुज़ारना, अटेंडेंस की मारामारी और लेट-नाइट पढ़ाई — हर इंजीनियरिंग स्टूडेंट की यही कहानी है। एक मज़ेदार कॉलेज-लाइफ कविता।


हर Engineering स्टूडेंट की एक ही कहानी है,
ना खाने का पता ना चाय ना पानी है,

Meggi-समोसे में दिन तो बिताना है,
College में फैकल्टी के चक्कर लगाना है,

Sessionals-Attendance की सब मारामारी है,
डिग्री पे पड़ रहे बैक अब भारी है,

ना सोने का पता ना उठने का ठिकाना है,
Laptop पे बैठ के रोज़ पिक्चर लगाना है,

झाड़ू-पोंछा-बर्तन भी एक परेशानी है,
शिवानी से पढ़ना इंजीनियर की निशानी है,

Late-night पढ़ के टॉप करने में मज़ा है,
टिफ़िन का खाना अब लगता सज़ा है,

हर एक महीने यहाँ पार्टी मनाते हैं,
गालियों से ही यहाँ प्यार जताते हैं,

दोस्तों की girlfriends को भाभी बुलाते हैं,
GF ना मिले तो crushes से ही काम चलाते हैं,

Facebook चलाए बिना दिन नहीं जाता है,
WhatsApp से अपना कुछ गहरा ही नाता है,

जैसी भी है यही ज़िंदगी बितानी है,
हर Engineering स्टूडेंट की तो एक ही कहानी है।

                                                  ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Wednesday, March 12, 2014

Wo Bachpan Ke Din – Childhood Nostalgia Kavita | Kirtish Shrotriya

ना GF की चिंता थी, ना फ्यूचर की — बस मिट्टी के खिलौने और दादी की कहानियाँ थीं। बचपन की मासूम यादों को समेटती एक प्यारी नॉस्टैल्जिक कविता।


वो बचपन के दिन भी कितने सुहाने थे, 

जहां वो हमारे मिट्टी के आशियाने थे,


खेल और खिलौनों की दुनिया बड़ी प्यारी थी, 

दादी का प्यार और नानी की कहानी थी, 

ना GF कि चिंता, ना फ्यूचर के ठिकाने थे, 

वो बचपन के दिन भी कितने सुहाने थे,


पैसे थोड़े कम, पर पक्की अपनी यारी थी, 

२-२ रुपए में भी हमको तो पार्टी माननी थी, 

जहां स्कूल की मस्ती और दोस्तों के ताने थे, 

वो बचपन के दिन भी कितने सुहाने थे,


बस हम ही हम थे सच्चे, और झूठी दुनियादारी थी, 

बस चार दोस्तों में बसती, अपनी दुनिया सारी थी, 

छोटी आंखो में बसते, वो सपने कितने सुहाने थे, 

वो बचपन के दिन भी कितने सुहाने थे,


क्या ख़ूबसूरत थे दिन, क्या ख़ूबसूरत जमाने थे, 

वो बचपन के दिन भी कितने सुहाने थे,

वो बचपन के दिन भी कितने सुहाने थे।।


                                        ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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