Wednesday, March 25, 2020

Khud ko badalkar to dekhiye



दो पल सुकून की तलाश में ही तो भटकते थे ना रात दिन,

अब मिला है सुकून, तो कुछ दिन इसमें भी बिता कर तो देखिए।।


थक कर सोने पर तो बस, अंधेरा ही दिखता था निंदो में,

अब है वक्त तो ख्वाबों की माला में, अपने भी सपने पिरो कर तो देखिए।।


दीवारों को कान होते हैं यह तो सुना था मगर,

क्या पता बोल उठे दीवारें, कुछ गप्पे इन से भी लड़ा कर भी तो देखिए।।


काम ही काम किया जिंदगी में, अपने लिए वक्त कहां,

अब कुछ ध्यान अपनी सेहत पर भी, लगा कर तो देखिए।।


बहुत से किस्से, कहानियां, कारनामे सुनने मिलेंगे तुमको,

कभी साथ बैठकर अपनों के, कुछ पल बातें करके तो देखिए।।


यूं तो हर रोज नई शख्सियत से तार्रुफ होता रहा मगर,

अब ज़रा खुद से भी रूबरू हो कर तो देखिए।।


शायद बढ़ चुकी हो दूरियां, वक्त की कमी से कुछ रिश्तों में कभी,

यही समय है फोन उठाइए और उनके नंबर लगा कर तो देखिए।।


गर दिया है कुछ वक्त जिंदगी ने तुम्हें,

तो इस वक्त में खुद को बदल कर तो देखिए ।।


                                         ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.


Sunday, March 22, 2020

Socha To Nahi Tha



सोचा तो था कि ५०-६० की उम्र तक पहुंचते हुए एक दिन ऐसा भी आएगा

पर ये नहीं सोचा था कि वो वक़्त इतनी कम उम्र में आ जाएगा


जब लोग किसी न्यूक्लियर मिसाइल या बॉम्ब से नहीं मरेंगे,

बल्कि एक छोटे से वायरस से कुछ इस कदर डरेंगे,


जब कुछ पल के लिए लोगों को यहां कलयुग का आभास होगा,

प्रलय तो नहीं कह सकते इसे, पर हां कोई तो महा विनाश होगा,


हर तरफ भय का कुछ यूं माहौल छा जाएगा,

जब काम छोड़ कर अपना हर कोई घर में बैठ जाएगा,


जहां मौत कोई मजहब को देख कर वार नहीं करेगी,

जब कोई बीमारी कोई जात पात देख कर शिकार नहीं करेगी,


जब हर तरफ हाहाकार होगा और सब कुछ यूं इतनी जल्दी बदल जाएगा,

इस तेज़ रफ़्तार से चलता यह जीवन चक्र में अचानक एक मोड़ पर रुक जाएगा,


हां सोचा तो था कि ५०-६० की उम्र तक पहुंचते पहुंचते एक दिन ऐसा आएगा,

पर ये नहीं सोचा था कि ये वक़्त इतना जल्दी आ जाएगा ।।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय



Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.

Saturday, March 14, 2020

Main 90's ka hun chhora



मैं 90's(नाइनटीस) का हूं छोरा,तू नई सदी की लड़की है,

मेरे अंधियारे जीवन में, तू बिजली सी कड़की है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है,


मैं सीधा सरल सा प्राणी हूं, तू फैशन गलियों की रानी है,

मैं खेलूं गिल्ली डंडा, तू पब्जी टिक टॉक की दीवानी है,

तुझको करनी दिनभर शॉपिंग, और अपनी हालत कड़की है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


मैं रेलवेज में करता सफर, तू एयरप्लेन में उड़ती है,

मेरे कपड़ों से तो छोटी, तेरी जींस और कुर्ती है,

मैं नजरों में शरम रखूं, पर तुझ में लाज ना दिखती है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


तू नेटफ्लिक्स को देखे हैं, मैं DD1 पर अटका हूं,

तू स्नैपचैट को यूज करें, मैं फेसबुक पर लटका हूं,

मैं बोलूं हिंदी की भाषा, तू अंग्रेजी पर मरती है

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


मैं पंखे में ही सो जाऊं, तू एसी की डिमांड करें,

मैं पहनूं लोकल से कपड़े, तू सिर्फ ब्रांड की बात करें,

मैं खाऊं घर की दाल चपाती, तू पिज्जा बर्गर को तड़पी है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


                                                     ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.