Thursday, September 6, 2018

Sirf Uske Ho Jayenge

जब भी कोई पूछे शादी कब करोगे, तो दिल में बस एक ही जवाब होता है — किसी का इंतज़ार। सच्चे प्यार के सपने बुनती एक रूमानी कविता।


जिंदगी की दौड़ में अकेले चलते-चलते, जब हम भी थक कर टूट जाएंगे ,

तब कहीं किसी मोड़ पर रुक, किसी हसीन चेहरे को देख हम भी मुस्कुराएंगे,


हम भी चुपके से उसका हाथ थाम, सात जनम साथ बिताने की कसमे खाएंगे,

हम भी दुनिया की भीड़ से कहीं दूर जा, उसके साथ ख्वाबों के पेंच लड़ाएंगे,


हम भी किन्ही वादियों के बिच उसके साथ, वो फिल्मी नग़मे गुन-गुनाएंगे,

फिर कभी छोटी-मोटी नोक झोक में, कभी उनसे रूठेंगे तो कभी उन्हें मनाएंगे..

 

अरे, हम भी तो कभी उनकी नशीली आँखों में आँख डाल, उस नशे में झूम जाएंगे,

हम भी जिसको शोना बाबू बेबी कह कर, प्यार से यूँ बुलायेंगे,


जिसके काँधे पर सर रख कर, हम रात भर बतियाएंगे,

गोद में जिसके रख कर सर, हम भी चैन से सो जाएंगे,


हम भी जिसकी खातिर, सारी दुनिया से लड़ जाएंगे,

हाथ थम कर हम भी जिसका, कदमों से कदम मिलायेंगे,


जिसके नाम को दिल में रख कर, प्यार का अलख जगाएंगे, 

फिर हम भी इश्क़ की हद में बढ़ कर, उसके और सिर्फ उसके हो कर ही रह जाएंगे,

जब जिंदगी की दौड़ में चलते-चलते, जब हम भी थक कर,, टूट जाएंगे,,,,


                                                                                         ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Friday, August 10, 2018

Desh Ka Batwara

धर्म, जाति और वोट बैंक की राजनीति ने देश को कितना बांटा है? स्वतंत्रता दिवस पर लिखी एक ओजस्वी और तीखी देशभक्ति कविता।


राजनीती के तुष्टिकरण में, देश को मेरे बाँटा है, 

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, नेताओ को जाता है,


वोट बैंक की राजनीती कर, जाती प्रान्त में बाँट दिया,

फिर भी शांति नहीं मिली तो, हिन्दू और मुस्लिम बाँट दिया,

ऊंच - निचे के भेद भाव में, आरक्षण ला कर लगा दिया,

और जिसने ऊँची आवज़ उठायी, उसे पैसो से दबाया जाता है,

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, नेताओ को जाता है,


जब बटवारे थे शुरू किये, रंगो तक को इनने बाँट दिया,

हिन्दी - उर्दू भी अलग हुई, गीता - कुरान भी बाँट दिया,

सोने की चिड़िया था ये, इसे सीमाओं में छाट दिया,

छोटे - छोटे टुकड़े कर के, भारत माँ तक को इनने बाँटा है ,

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, नेताओ को जाता है,


अंग्रेजी शिक्षा को लाकर, देसी संस्कारों को बाँट दिया,

सत्ता कुर्सी के भूके ऐसे, की अपने अपनों मार दिया,

चन्द वोट के लालच में, गौ माता तक को काट दिया ,

भ्रस्टाचारी और घूसखोरी, जिनको बड़ा लुभाता है,

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, उन नेताओ को जाता है,


सिंहासन के खातिर , ना जाने कितनो को मरवा दिया,

प्रेम मिटा कर इंसा में, हिंसा को बड़वा दिया ,

गिरा के मंदिर मस्जिद को, दंगो को भड़का दिया ,

और १ कुर्सी के लालच में, ना जाने कितने शिशो को इन्होंने काटा है ,

मेरे देश के बंटवारे का श्रेय, उन गद्दारो को जाता है..

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, उन नेताओ को जाता है..


                                               ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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सभी भारत वासियों को स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनायें ,   जय हिन्द..!!


Wednesday, July 25, 2018

2 Dino ka Desh Prem

क्या हमारा देशप्रेम सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी तक ही सीमित है? तिरंगे के सम्मान पर एक करारा और सोचने पर मजबूर करने वाला सवाल।

चंद पंक्तियाँ देश के नाम, उस तिरंगे के नाम जिसे बस साल में २ बार याद किया जाता है ,
जो १५ अगस्त और २६ जनवरी को हर साल देश की आन बान शान में हमेशा लहराता है 
 पर फिर अगले ही दिन सड़को पर धूल खाता पाया जाता है..

  

फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आएगा.. 

चलो कुछ दिन बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा..


२६ जनवरी की शाम को बंद कर के जहा रखा था झंडा,

उन  डब्बो से धूल हटाया जाएगा ..

साल में २ दिन ही सही पर वो तिरंगा फिर से बाहर निकाला जाएगा..

जब हर चौक चौराहे पर तिरंगा फेहराया जाएगा

फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आएगा..

चलो कुछ दिन बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा..


बड़-चढ़ कर फेसबुक-व्हाट्सप्प पर पोस्ट लगाया जाएगा..

फिर से एक दिन देश के नाम राष्ट्रगान गया जाएगा..

जब देश प्रेम के गीतों को हर जगह सुनाया जाएगा..

मगर क्या देश पर दी कुरबनी को कोई याद भी करने जाएगा..?

हाँ पर १ दिन और घूमने को लोगो का प्लान जरूर बन जाएगा..

चलो कुछ दिनों क बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा..

फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आ जाएगा.


जब बच्चा बच्चा हाथ में झंडा ले कर विद्यालय तक जाएगा 

पर वही झंडा जब अगले दिन सड़को पर धूल खता पाया जाएगा.

जब कूड़ा बन कर गलियों में पेरो से कुचला जाएगा,

फिर शर्मसार हो कर के डब्बो में बंद हो जाएगा..

चलो कुछ दिनों क बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा..

फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आ जाएगा..


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय



आइये हम सब ये प्रण ले की अब से हमारे प्यारे तिरंगे को सड़को पर कचरे की तरह न फेके 
और दिल से उसका सम्मान करे .
जय हिन्द..!!


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Sunday, June 24, 2018

Ek Benaam Rishta

कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिन्हें कोई नाम नहीं दिया जा सकता, फिर भी दिल में गहरी जगह बना लेते हैं। एक अनकहे रिश्ते की गहरी दास्तान।



एक अजनबी अनजाना सा रिश्ता होता है

जिसे हम हर किसी को चंद शब्दों में बता नहीं सकते,

हम तो समझते है पर किसी को समझा नहीं सकते,

लगता है कौन समझेगा हमारी इन बातो को,


रात के अँधेरे में सबसे छुप कर व्हाट्सप्प पर उनसे की हुई उन बातो को,

हर उस पल को जो हमने उसके साथ बिताया था,

हर उस ख्वाब को जो उसके साथ सजाया था,

हर उस पल में जब महसूस किया उसे,

हर वो घडी में जब दिल ने याद का उसे,


हर वो दिन बिलकुल भी अच्छा नहीं गुजरता,

जिस दिन उनसे मेरी बात नहीं होती,

और मुझे जरा भी अच्छा नहीं लगता, 

जब बहुत कोशिशों के बाद भी उनसे मुलाकात नहीं होती,


मगर सबकी तकदीरो में वो प्यार नहीं होता,

हर साथ देखा सपना साकार नहीं होता,

हर दिन रिश्ते में आती हज़ारो मुसीबते,

और फिर उन मुसीबतो का हमारे पास जवाब नहीं होता, 


ना मिल पाते ना बिछड़ पते है अजीब सी कश्मकश होती है, 

दिल और दिमाग की यही आ कर तो एक जंग होती है, 

दिल कुछ कहता है दिमाग कुछ और, 

नहीं समझ आता किसकी सुने और किसे करे ignore,


ये दिल और दिमाग की जुंग तो बरसो पुरानी है, 

इसे न आज तक कोई समझ पाया है सब कुछ जानते समझते हुए भी, 

ये दिमाग न कभी दिल से जीत पाया है,

ये बाते जान समझ करने क बाद तो हम भी कुछ नहीं कर सकते थे, 

तो छोड़ दिए उस रिश्ते को खूबसूरत से मोड़ पर ला कर,

जिसे हम कोई नाम नहीं दे सकते थे..!!


                                               ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Sunday, April 22, 2018

Maine Waqt Badalte Dekha hai

पैसों की चमक में सच्चे रिश्ते और वफ़ा भी बिक जाते हैं देखा है। वक़्त की बदलती चाल पर एक गहरी और सच्ची कविता।


मेने तूफानों को साहिलो पर ठहरते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने दिन के उजालो को, रात के अँधेरे में बदलते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने हर दिल अजीज़ लोगो को भी, एक पलभर में बिछड़ते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


चंद रुपयों के लालच में, अपनों को अपनों से झगड़ते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखे है..


एक सत्ता की कुर्सी के आगे, अच्छे अच्छों का ईमान सड़क पर बिकते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


बाज़ारो में बड़ी बड़ी साख़ रखने वालो को, पल में राख़ होते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


अपनी दौलत पर गुरुर करने वाले को भी एक दिन, पाई पाई का मोहताज होते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने सच्ची मोहब्बत को भी, दौलत के तराज़ू में तोलते हुए देखा है.. 

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने तूफानों को साहिलो पर ठहरते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..

हाँ मेने इस छोटे से वक़्त में बहुत कुछ देखा है.. !!


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Saturday, March 24, 2018

NAA JAANE KYUN..?

ना जाने क्यों कुछ अजनबी चेहरे भी अपने से लगने लगते हैं, और उनके सामने आते ही सारे लफ्ज़ गुम हो जाते हैं। एक अनकहे, अनजाने से इश्क़ की गहरी दास्तान।


ना जाने क्यों आज कुछ लिखने को मन करता है, 

ना जाने क्यों कभी-कभी कोई अजनबी भी अपना सा लगता है।


ना जाने क्यों उसकी हर बात हमें अच्छी लगने लगती है.. 

कभी-कभी सोचते हैं कहें बहुत कुछ उनसे.. 

पर उनके सामने आते ही अल्फ़ाज़ भी गुम से हो जाते हैं..


ना जाने ऐसा क्या है  उनमें जो हर दिन, हर पल उन्हें देखने को जी करता है.. 

क्यों उनको ना देखूँ तो दिन भी अच्छा नहीं गुज़रता है..


ना जाने क्यों दिल में हज़ारों ख़्याल से आने लगते हैं.. 

ना जाने क्यों बस slow songs ही दिल को भाने लगते हैं..


दिन के उजालों से रात के अंधेरों तक बस कुछ अच्छा नहीं लगता.. 

उनके सिवा दुनिया में कोई भी सच्चा नहीं लगता, ना जाने क्यों..


ना जाने कितने ही अल्फ़ाज़ लबों पर आ कर थमने लगते हैं.. 

जब शब्द गुम से हो जाते हैं और नैना बातें करने लगते हैं, ना जाने क्यों ..


ना जाने क्यों लगता है जब उनके साथ होता हूँ तो वक़्त ठहर सा जाए.. 

घड़ी की सुइयाँ रुक जाएँ.. दुनिया वाले कहीं खो जाएँ.. 

बस रह जाएँ तो वो और मैं, ना जाने क्यों.. ना जाने क्यों..


                                                    ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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