जब भी कोई पूछे शादी कब करोगे, तो दिल में बस एक ही जवाब होता है — किसी का इंतज़ार। सच्चे प्यार के सपने बुनती एक रूमानी कविता।
जिंदगी की दौड़ में अकेले चलते-चलते, जब हम भी थक कर टूट जाएंगे ,
तब कहीं किसी मोड़ पर रुक, किसी हसीन चेहरे को देख हम भी मुस्कुराएंगे,
हम भी चुपके से उसका हाथ थाम, सात जनम साथ बिताने की कसमे खाएंगे,
हम भी दुनिया की भीड़ से कहीं दूर जा, उसके साथ ख्वाबों के पेंच लड़ाएंगे,
हम भी किन्ही वादियों के बिच उसके साथ, वो फिल्मी नग़मे गुन-गुनाएंगे,
फिर कभी छोटी-मोटी नोक झोक में, कभी उनसे रूठेंगे तो कभी उन्हें मनाएंगे..
अरे, हम भी तो कभी उनकी नशीली आँखों में आँख डाल, उस नशे में झूम जाएंगे,
हम भी जिसको शोना बाबू बेबी कह कर, प्यार से यूँ बुलायेंगे,
जिसके काँधे पर सर रख कर, हम रात भर बतियाएंगे,
गोद में जिसके रख कर सर, हम भी चैन से सो जाएंगे,
हम भी जिसकी खातिर, सारी दुनिया से लड़ जाएंगे,
हाथ थम कर हम भी जिसका, कदमों से कदम मिलायेंगे,
जिसके नाम को दिल में रख कर, प्यार का अलख जगाएंगे,
फिर हम भी इश्क़ की हद में बढ़ कर, उसके और सिर्फ उसके हो कर ही रह जाएंगे,
जब जिंदगी की दौड़ में चलते-चलते, जब हम भी थक कर,, टूट जाएंगे,,,,
~ किर्तिश श्रोत्रिय