Tuesday, May 19, 2026

Ghar achha lagta hai


ना पहाड़ों में जी लगता है, 

ना समंदर में दिल लगता है

मैं औरों से थोड़ा अलग हूँ जनाब, 

मुझे बस अपना घर अच्छा लगता है।


जिंदगी की भीड़ में खुद को खोया नहीं मैंने,

मुझे अब भी अपना सफर अच्छा लगता है।


रात के अंधेरों में लिखता हूँ अक्सर,

मुझे बस मेरा हुनर अच्छा लगता है।


बातों में छुपी खामोशी को पहचान लेता हूँ,

मुझे तेरा जज़्बात इस कदर अच्छा लगता है।


जब से रखा है उसने मोहल्ले में पैर अपना,

तब से मुझे मेरा शहर अच्छा लगता है।


उसकी सहेलियों ने छुपकर बताया है मुझे,

उसे आज भी मेरा इश्क हर नज़र अच्छा लगता है।


तेरे जाने के बाद, अब तन्हाई में मुझे,

इस ज़माने में सिर्फ़ ज़हर अच्छा लगता है।


                                        ~ किर्तिश श्रोत्रिय





Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.

Tuesday, May 12, 2026

Dard


क्या अपना कोई दर्द लिखूं मैं,

क्या अपने जज़्बात लिखूं।

नस-नस में है चुभते काँटे,

कैसे अपने हालत लिखूँ।


अंतर्मन में जलती ज्वाला,

तन शोलो का संचार करे।

पल पल बढ़ती इस अग्नि को,

कैसे सरिता की धार लिखूँ।


मैत्री के इन वृक्षों पर,

सभी फूल मुरझाये है।

इस उजड़े हुए चमन को मैं,

कैसे बगिया गुलज़ार लिखूँ।


धक धक प्रतिपल चलती धड़कन,

धड़कन में किसका नाम लिखूँ।

इस टूटे हुए हृदय से मैं,

कैसे साँसों का हिसाब लिखूँ।


अपने जीवन को अब कैसे,

अनुपम सहज साकार लिखूँ।

अपनी हृदय वेदना को कैसे मैं,

इस जीवन का आधार लिखूँ।


                            ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.

Tuesday, May 5, 2026

Wo jo dikha nahi hai Kai Zamane se


वो जो दिखा नहीं है कई जमाने से।

कोई मिला दो उस चाँद को इस परवाने से।


रुपया, ज़मीन, जायदाद जो भी है सब ले जाओ।

बस दिखा दो उसकी एक झलक किसी बहाने से।


कितना है, कैसा है, क्यों है, उनसे इश्क़ ये ना पूछो।

चाहतो की बातो को, तोला नही करते किसी पैमाने से।


वो कसमें, वो वादे, वो बाते उनकी।

अब धुन्दला गयी है दिन के आशियाने से।


इश्क है उनसे ये कहा था, कहा है, कहेंगे हर दिन।

मोहब्बत करने वाले डरते नहीं ज़माने से।


दीदार-ए-यार को तड़पे है बहुत ज़मानों से।

उनसे कहना एक बार तो आ कर मिल ले अपने दीवाने से।


                                                               ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.

Tuesday, April 28, 2026

Mradu kar

अपने म्रदु कर से जब पुष्पों को, शाख से तोड़ती होगी।

तो शाख़ें भी, खुशी में फिर, भवँर को चूमती होगी।


साँस ले कर के जो अपनी, हवाओं को भी महका दे,

हवा भी रोब में तनकर, गगन में घूमती होगी।


नरम पैरों से अपने जब, पानी नहरों का सहला दे,

तो नहरें भी, ख़ुद को दरिया, समझ कर झूमती होगी।


जो गा कर इश्क़ का गाना, सरगमें कोई छेड़ दे,

तो सरगम भी मौज़ में, धुन नई सी बुनती होगी।


सुर्ख होठों से अपने जो, कभी कोई नज़्म कह दे तो।

नज़्म भी रूप गज़लों का, शौक से चुनती होगी।


                                                        ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.

Tuesday, April 21, 2026

Kaun ho tum

यूँ चुपके से दिल मे कर गए दस्तक,

ज़रा बताओ तो कौन हो तुम,


है यह आँखों का धोका कोई,

या झूठा सा कोई ख्वाब हो तुम,


है यह बिन माँगी सी मन्नत कोई,

या अलादीन का खोया चिराग़ हो तुम,


है यह बुजुर्गों का दिया आशीर्वाद कोई,

या इस ज़िद्दी दिल की अरदास हो तुम


है यह जाम से छलका कतरा कोई,

या मैक़दे की पूरी शराब हो तुम,


है यह चाँद सी शीतल किरणे कोई,

या रोशनी से भरा आफताब हो तुम,


ज़हन में उतर मेरे, नींदे भी छीन ली मुझसे,

सच कहूं, हां सच कहूं तो बहुत खराब हो तुम।


                                                    ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.


Tuesday, April 14, 2026

Naa jaane kaun hai wo


ढलती हुई शामों में, शबनम सी बिख़र जाती है।

ना जाने कौन है वो, जो हर रोज़ मेरे सपने में आती है।


ना कभी नाम कहा उसने, ना अपना पता बताती है।

ना कभी नाराज़ हुई मुझसे, ना कभी गुस्सा जताती है।


ना कभी कुछ माँगा उसने, ना कभी अपना हक जताती है।

ना कभी सताया मुझको, ना कभी मेरा दिल जलाती है।


मेरे हर सवाल के जवाब में, वो कुछ यूँ नज़रें झुकाती है।

बिन कुछ कहे भी उनकी नज़र, बहुत कुछ कह जाती है।

 

ख़्वाबों में उन्हें देखते हुए, सहर से दोपहर हो जाती है।

कम्बख़्त यही एक वज़ह है, की हमें नींद बहुत आती है।


फिर भी वो हर रात, इस दिल को नई आरज़ू दे जाती है।

ना जाने कौन है वो, जो हर रोज़ मेरे सपने में आती है।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.

Thursday, December 31, 2020

Thankyou 2020

शुक्रिया-ए-2020 जिंदगी की कीमत समझाने के लिए।

शुक्रिया-ए-2020 जीने का सही मतलब समझाने के लिए।


हाँ माना तुम थोड़े ज्यादा निर्दयी, निष्ठुर और क्रूर थे।

पर हमे जीवन के सही मायने सिखाने को मजबूर थे।


इस बात को बताया तुमने की हम अब तक कितने भ्रम में थे।

अभी जीने को बहुत लंबी जिंदगी है इस वहम में थे।


जब चार दिवारी में बैठ कर कुछ महीने बिताने लगे।

अपनों के साथ रहने की ख़ुशी तभी समझ पाने लगे।


शुद्ध और ताज़ी हवा से हमे रूबरू भी कराया तुमने।

हमने पर्यावरण बर्बाद कर रखा था, महसूस भी कराया तुमने।


तुमने यह भी समझाया कि हम कम में भी गुजारा कर सकते है।

फ़िज़ूल के दिखावें से अच्छा तो किसी इंसा का पेट भर सकते है।


हमारे अंदर छुपी कलाओं को निखारा है तुमने।

कही शेफ़, कही सिंगर, तो कही पेंटर निकाला है तुमने।


रामायण महाभारत का इतिहास फिर से दिखाया है तुमने।

होली से न्यू ईयर तक सारे त्यौहारों को घर पर मनवाया है तुमने।


छोटी छोटी खुशियों की हमें अहमियत समझाने के लिए।

लॉक डाउन के बहाने ही अपनों के साथ थोड़ा वक्त दिलाने के लिए।


शुक्रिया-ए-2020, हमारी जिंदगी में आने के लिए।

शुक्रिया-ए-2020 जिंदगी की कीमत समझाने के लिए।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.

Tuesday, July 14, 2020

Neta Bikta Hai !


सत्ताए बदली है सारी राजनीति की संधि में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


भ्रष्टाचार कर कर के इन्होंने, जाने कितना कमा लिया।

घूसखोरी का सारा पैसा, दो नंबर में लगा दिया।

इनको कभी नहीं है परवाह, देश चले चाहे मंदी में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


कभी इधर कभी उधर कूदते, टेबल टेनिस बना दिया।

देश का फ्यूचर अधर में लटका, खुद का फ्यूचर बना लिया।

कितना ही रख लो इनको तुम, 5 स्टार की पाबंदी में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


एक पार्टी से लूट लिया, अब दुजी पार्टी की बारी है।

हर बार इन्होने दिखलाया, की इनको लक्ष्मी प्यारी है।

इनको सिर्फ चाहिए पैसा, गर्मी हो या ठंडी में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


भला बुरा सब भूल गए, सब अपने पराए भूल गए।

सत्ता कुर्सी के मोह में पड़, सारे उसूल भी भूल गए।

कल के आए बन गए मंत्री, अपने रह गए रज़ामंदी में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


सत्ताए बदली है सारी राजनीति की संधि में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


                                              ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.

Wednesday, March 25, 2020

Khud ko badalkar to dekhiye



दो पल सुकून की तलाश में ही तो भटकते थे ना रात दिन,

अब मिला है सुकून, तो कुछ दिन इसमें भी बिता कर तो देखिए।।


थक कर सोने पर तो बस, अंधेरा ही दिखता था निंदो में,

अब है वक्त तो ख्वाबों की माला में, अपने भी सपने पिरो कर तो देखिए।।


दीवारों को कान होते हैं यह तो सुना था मगर,

क्या पता बोल उठे दीवारें, कुछ गप्पे इन से भी लड़ा कर भी तो देखिए।।


काम ही काम किया जिंदगी में, अपने लिए वक्त कहां,

अब कुछ ध्यान अपनी सेहत पर भी, लगा कर तो देखिए।।


बहुत से किस्से, कहानियां, कारनामे सुनने मिलेंगे तुमको,

कभी साथ बैठकर अपनों के, कुछ पल बातें करके तो देखिए।।


यूं तो हर रोज नई शख्सियत से तार्रुफ होता रहा मगर,

अब ज़रा खुद से भी रूबरू हो कर तो देखिए।।


शायद बढ़ चुकी हो दूरियां, वक्त की कमी से कुछ रिश्तों में कभी,

यही समय है फोन उठाइए और उनके नंबर लगा कर तो देखिए।।


गर दिया है कुछ वक्त जिंदगी ने तुम्हें,

तो इस वक्त में खुद को बदल कर तो देखिए ।।


                                         ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.


Sunday, March 22, 2020

Socha To Nahi Tha



सोचा तो था कि ५०-६० की उम्र तक पहुंचते हुए एक दिन ऐसा भी आएगा

पर ये नहीं सोचा था कि वो वक़्त इतनी कम उम्र में आ जाएगा


जब लोग किसी न्यूक्लियर मिसाइल या बॉम्ब से नहीं मरेंगे,

बल्कि एक छोटे से वायरस से कुछ इस कदर डरेंगे,


जब कुछ पल के लिए लोगों को यहां कलयुग का आभास होगा,

प्रलय तो नहीं कह सकते इसे, पर हां कोई तो महा विनाश होगा,


हर तरफ भय का कुछ यूं माहौल छा जाएगा,

जब काम छोड़ कर अपना हर कोई घर में बैठ जाएगा,


जहां मौत कोई मजहब को देख कर वार नहीं करेगी,

जब कोई बीमारी कोई जात पात देख कर शिकार नहीं करेगी,


जब हर तरफ हाहाकार होगा और सब कुछ यूं इतनी जल्दी बदल जाएगा,

इस तेज़ रफ़्तार से चलता यह जीवन चक्र में अचानक एक मोड़ पर रुक जाएगा,


हां सोचा तो था कि ५०-६० की उम्र तक पहुंचते पहुंचते एक दिन ऐसा आएगा,

पर ये नहीं सोचा था कि ये वक़्त इतना जल्दी आ जाएगा ।।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय



Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.

Saturday, March 14, 2020

Main 90's ka hun chhora



मैं 90's(नाइनटीस) का हूं छोरा,तू नई सदी की लड़की है,

मेरे अंधियारे जीवन में, तू बिजली सी कड़की है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है,


मैं सीधा सरल सा प्राणी हूं, तू फैशन गलियों की रानी है,

मैं खेलूं गिल्ली डंडा, तू पब्जी टिक टॉक की दीवानी है,

तुझको करनी दिनभर शॉपिंग, और अपनी हालत कड़की है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


मैं रेलवेज में करता सफर, तू एयरप्लेन में उड़ती है,

मेरे कपड़ों से तो छोटी, तेरी जींस और कुर्ती है,

मैं नजरों में शरम रखूं, पर तुझ में लाज ना दिखती है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


तू नेटफ्लिक्स को देखे हैं, मैं DD1 पर अटका हूं,

तू स्नैपचैट को यूज करें, मैं फेसबुक पर लटका हूं,

मैं बोलूं हिंदी की भाषा, तू अंग्रेजी पर मरती है

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


मैं पंखे में ही सो जाऊं, तू एसी की डिमांड करें,

मैं पहनूं लोकल से कपड़े, तू सिर्फ ब्रांड की बात करें,

मैं खाऊं घर की दाल चपाती, तू पिज्जा बर्गर को तड़पी है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


                                                     ~ किर्तिश श्रोत्रिय




Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.