Tuesday, July 14, 2020

Neta Bikta Hai !


सत्ताए बदली है सारी राजनीति की संधि में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


भ्रष्टाचार कर कर के इन्होंने, जाने कितना कमा लिया।

घूसखोरी का सारा पैसा, दो नंबर में लगा दिया।

इनको कभी नहीं है परवाह, देश चले चाहे मंदी में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


कभी इधर कभी उधर कूदते, टेबल टेनिस बना दिया।

देश का फ्यूचर अधर में लटका, खुद का फ्यूचर बना लिया।

कितना ही रख लो इनको तुम, 5 स्टार की पाबंदी में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


एक पार्टी से लूट लिया, अब दुजी पार्टी की बारी है।

हर बार इन्होने दिखलाया, की इनको लक्ष्मी प्यारी है।

इनको सिर्फ चाहिए पैसा, गर्मी हो या ठंडी में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


भला बुरा सब भूल गए, सब अपने पराए भूल गए।

सत्ता कुर्सी के मोह में पड़, सारे उसूल भी भूल गए।

कल के आए बन गए मंत्री, अपने रह गए रज़ामंदी में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


सत्ताए बदली है सारी राजनीति की संधि में।

हर नेता बिकता है प्यारे लोकतंत्र की मंडी में।।


                                              ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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