Tuesday, June 16, 2015

Farewell

पहले दिन जो अजनबी थे, आखिरी दिन जान बन गए। कॉलेज की मस्ती, बंक और दोस्ती को याद करती एक भावुक विदाई कविता।



जब 1st ईयर में मिले थे तब अनजान थे जो, 

आज वही एक-दूसरे की जान हो गए..


कभी सोचते थे 4 लेक्चर तो निकलेंगे कैसे, 

ना जाने कब यहाँ 4 साल पूरे हो गए..


सुख-दुख अच्छा-बुरा सभी में रहे थे साथ, 

क्लास में सभी से करते थे मस्ती-मज़ाक..


लड़ते भी झगड़ते भी, दिन यहीं कटते थे, 

लेक्चर से बंक मार के कैंटीन में मिलते थे..


और आज सोचते हैं क्यों हम इतने बड़े हो गए, 

क्यों फ्यूचर की दौड़ में अपनों से दूर हो गए..


और जब आए थे तब कुछ भी नहीं था हमारे हाथ, 

जाते-जाते यादों की बारात ले गए..


आई है घड़ी जिसे विदाई कहते हैं सभी, 

पर अलविदा कहने को दिल नहीं मानता.... 

अलविदा कहने को दिल नहीं मानता..

        

                                ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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