एक अजनबी अनजाना सा रिश्ता होता है
जिसे हम हर किसी को चंद शब्दों में बता नहीं सकते,
हम तो समझते है पर किसी को समझा नहीं सकते,
लगता है कौन समझेगा हमारी इन बातो को,
रात के अँधेरे में सबसे छुप कर व्हाट्सप्प पर उनसे की हुई उन बातो को,
हर उस पल को जो हमने उसके साथ बिताया था,
हर उस ख्वाब को जो उसके साथ सजाया था,
हर उस पल में जब महसूस किया उसे,
हर वो घडी में जब दिल ने याद का उसे,
हर वो दिन बिलकुल भी अच्छा नहीं गुजरता,
जिस दिन उनसे मेरी बात नहीं होती,
और मुझे जरा भी अच्छा नहीं लगता,
जब बहुत कोशिशों के बाद भी उनसे मुलाकात नहीं होती,
मगर सबकी तकदीरो में वो प्यार नहीं होता,
हर साथ देखा सपना साकार नहीं होता,
हर दिन रिश्ते में आती हज़ारो मुसीबते,
और फिर उन मुसीबतो का हमारे पास जवाब नहीं होता,
ना मिल पाते ना बिछड़ पते है अजीब सी कश्मकश होती है,
दिल और दिमाग की यही आ कर तो एक जंग होती है,
दिल कुछ कहता है दिमाग कुछ और,
नहीं समझ आता किसकी सुने और किसे करे ignore,
ये दिल और दिमाग की जुंग तो बरसो पुरानी है,
इसे न आज तक कोई समझ पाया है सब कुछ जानते समझते हुए भी,
ये दिमाग न कभी दिल से जीत पाया है,
ये बाते जान समझ करने क बाद तो हम भी कुछ नहीं कर सकते थे,
तो छोड़ दिए उस रिश्ते को खूबसूरत से मोड़ पर ला कर,
जिसे हम कोई नाम नहीं दे सकते थे..!!
~ किर्तिश श्रोत्रिय