Thursday, October 10, 2019

Na jane Kidhar hun mai


कई अरसे से ढूंढ रहा हूँ शख़्सियत अपनी,

ना जाने इस वक़्त मैं कौन से शहर में हूँ ,


मैं अपनी ही सोच के अगर-मगर में हूँ,

शायद मैं एक दुनिया से दूसरी दुनिया के सफर में हूँ,


जिसे सुन कर भी अनसुना नहीं कर पाते है लोग अक्सर,

आज तो मैं उसी अनचाही सी खबर में हूँ,


कल तक खटकता था तिनका बन कर जिनकी आँखों में मैं,

देखो आज में उन सभी लोगो की नज़र में हूँ,


कोई बुझा दो रात के इन जलते चिरागों को जा कर,

आज मैं अपनी नई जिंदगी की, नई सहर में  हूँ,


अब तक लगता था मुझे दुश्मनों के दिमाग में है घर मेरा,

अपने दोस्तों के तो में हमेशा से जिगर में हूँ,


बहुत अँधेरा सा दिखाई दे रहा है मुझे चारो तरफ अपने,

अरे लगता है, मैं अपने ही लोगो की खोदी हुई कबर में हूँ ।।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Tuesday, July 30, 2019

Khud Se Mohabbat

Sometimes it's not bad to be self-obsessed 😜 

कितना आसान है ना, खुद से मोहब्बत कर लेना 


खुद से ही लड़ना,झगड़ना, खुद ही में रो देना,

खुद से ही मिलना, बिछड़ना और खुद ही को खो देना,

खुद ही को देकर के तोहफे, खुद ही मैं खुश हो लेना, 

कितना आसान है ना, खुद से मोहब्बत कर लेना ।।


खुद ही को लेकर तन्हाई में, यूँ सड़कों पर चल लेना,

देकर हजारों मुसीबतें खुद को, खुद ही को उसका हल देना,

खुद को ही खो कर हर रात, हर सुबह खुद को ही पा लेना,

 कितना आसान है ना, खुद से मोहब्बत कर लेना ।।


खुद की ही हथेली पर, लिख कर नाम खुद का, खुद ही से पढ़ लेना,

खुद की ही खुशियों की खातिर, सारी दुनिया से लड़ लेना,

खुद ही पर मर गए हर पल, खुद के लिए ही जी लेना,

कितना आसान है ना, खुद से मोहब्बत कर लेना ।।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Monday, April 15, 2019

Ye Rasta Mujhse Baat Karta Hai


मैं जब चलता हूँ, ये चाँद मेरे साथ चलता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


दुनिया जहां की सारी बंदिशों से, ये मेरे मन को आज़ाद करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये सिखाता है मुझे, की इन रास्तों की तरह, जीवन का पथ भी आसान नहीं है,

और गिरेगा तू लड़खड़ा कर, जो आगे तेरा ध्यान नहीं है,

इसी तरह बातों ही बातों में, हर बार मेरा ख्याल करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये हर दिन मिलता मुझे नए अजनबियों से, हर पल उन्हें पीछे छोड़ देता है,

और कुछ इस तरह ये मेरे जीवन को, हर पल एक नया मोड़ देता है,

फिर हर नई सुबह, एक नई किरण के साथ एक नया आगाज करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये बताता है मुझे, की सबके जीवन में मुश्किलों के रेड सिग्नल्स आते है,

और डट कर खड़े रहे कुछ देर उनके आगे, तो कुछ पल में वो भी ग्रीन हो जाते है ,

इसी तरह के नुस्खों से ये मेरे जीवन को साकार करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये कहता है मुझे, की जिंदगी की तरह सफर में भी, सुरक्षा का इंतज़ाम जरूरी होता है,

और कोई करे या ना करे, पर हर पल तुम्हरी माँ को, तुम्हारा इंतज़ार जरूर होता है,

इसी तरह, सारी मुसीबतों से रक्षा ये मेरी हर बार करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये कहता है मुझे, की करी जो बस मंज़िलो की परवाह तुमने, तो ये रास्ता पीछे छूट जाएगा,

और की जो बस कल की चिंता जो तुमने, तो तुम्हारा आज भी तुमसे रूठ जाएगा,

ऐसी ही अच्छी-अच्छी बातें, ये मुझसे दिन रात करता है,

बड़ा मजा आता है मुझे, जब ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


मैं जब चलता हूँ, ये चाँद मेरे साथ चलता है,

मुझे अक्सर लगता है, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Saturday, January 12, 2019

Ye Kaun Sa Desh Hain

I Know it's not that perfect but I guess it's enough to convey the right message 

महिलाओं पर जहाँ अत्याचार तुम दिन रात करते हो।

ये कौन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


जिन नो दिनों में देवी मान कर पूजते हो जिसे, 

उन दिनों में भी अपनी गन्दी नज़रों से उसका शिकार करते हो।

ये कौन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


रात को घर से निकलने से जहाँ डरती है औरते,

वहाँ उनके पहनावे मात्र से ही उनके करैक्टर पर सवाल करते हो।

ये कौन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


जहाँ श्री कृष्ण ने प्रेम की पवित्रता का वर्णन किआ है, 

वहाँ तुम अपनी गंदी वासनाओ को भी प्रेम का नाम देते हो।

ये कौंन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


नन्हीं सी बच्ची जो लक्ष्मी और सरस्वती का रूप मानी जाती है, 

उसकी मासूमियत से भी तुम इस तरह खिलवाड़ करते हो।

ये कौंन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


औरत जहाँ शांति और समृद्धि का प्रतिक मानी जाती है,

फिर क्यों उन्हें घिनौनी हरकत कर बेबस और लाचार करते हो।

ये कौंन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।

                                                         

                                                        ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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