Tuesday, April 28, 2026

Mradu Kar – Shuddh Hindi Ishq Ghazal | Kirtish Shrotriya

क्या मोहब्बत की एक हल्की सी छुअन भी पूरी कायनात को हिला सकती है? शुद्ध हिंदी में गुंथी यह नाज़ुक ग़ज़ल इश्क़ के उसी नर्म, जादुई एहसास को शब्दों में पिरोती है।

अपने म्रदु कर से जब पुष्पों को, शाख से तोड़ती होगी।

तो शाख़ें भी, खुशी में फिर, भवँर को चूमती होगी।


साँस ले कर के जो अपनी, हवाओं को भी महका दे,

हवा भी रोब में तनकर, गगन में घूमती होगी।


नरम पैरों से अपने जब, पानी नहरों का सहला दे,

तो नहरें भी, ख़ुद को दरिया, समझ कर झूमती होगी।


जो गा कर इश्क़ का गाना, सरगमें कोई छेड़ दे,

तो सरगम भी मौज़ में, धुन नई सी बुनती होगी।


सुर्ख होठों से अपने जो, कभी कोई नज़्म कह दे तो।

नज़्म भी रूप गज़लों का, शौक से चुनती होगी।


                                                        ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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