चुपके से दिल में दस्तक दे कर नींदें उड़ा देने वाला वो कौन है — कोई ख्वाब, कोई दुआ या कोई रोशनी? एक दिलचस्प और रूमानी सवाल पूछती यह कविता।
यूँ चुपके से दिल मे कर गए दस्तक,
ज़रा बताओ तो कौन हो तुम,
है यह आँखों का धोका कोई,
या झूठा सा कोई ख्वाब हो तुम,
है यह बिन माँगी सी मन्नत कोई,
या अलादीन का खोया चिराग़ हो तुम,
है यह बुजुर्गों का दिया आशीर्वाद कोई,
या इस ज़िद्दी दिल की अरदास हो तुम
है यह जाम से छलका कतरा कोई,
या मैक़दे की पूरी शराब हो तुम,
है यह चाँद सी शीतल किरणे कोई,
या रोशनी से भरा आफताब हो तुम,
ज़हन में उतर मेरे, नींदे भी छीन ली मुझसे,
सच कहूं, हां सच कहूं तो बहुत खराब हो तुम।
~ किर्तिश श्रोत्रिय
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