Tuesday, June 2, 2026

Hathon me tera hath ho

समंदर की लहरें, चाँदनी रात और बस हाथों में तेरा हाथ — क्या मोहब्बत का यही सबसे ख़ूबसूरत ख़्वाब नहीं होता? एक रूमानी एहसास से भरी कविता।


लहरों की आवाज़ हो, आँखों आँखों में बात हो,  
साहिलों पर बैठे रहें हम, और हाथों में तेरा हाथ हो।  

झिलमिल सितारों से सजी हुई, एक शबनमी कायनात हो,  
दूर तलक खामोशी हो, कोई भी आस-पास न हो।  
बस यूंही तेरे पास बैठे रहें हम, और हाथों में तेरा हाथ हो।  

दिलों में बजते गीत में, मोहब्बत के जजबात हो,  
हवाओं में जो महसूस हो, वह बेहिसाब इश्क़ हो।  
बस यूंही तेरे पास बैठे रहें हम, और हाथों में तेरा हाथ हो।  

सुनहरी साँझ के आलम में सजे, मखमली से ख्वाब हों,  
संगीत की तारों में उलझे हुए, इश्क़ के वो साज़ हों।  
बस यूंही तेरे पास बैठे रहें हम, और हाथों में तेरा हाथ हो।  

चाँद की चाँदनी में रंगा, हुस्न का लिबास हो,  
दिल की हर धड़कन में बसा, इश्क़ का एहसास हो।  
बस यूंही तेरे पास बैठे रहें हम, और हाथों में तेरा हाथ हो।

~ किर्तिश श्रोत्रिय




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