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Thursday, December 31, 2020

Thankyou 2020 – Saal Ka Dhanyawad | Kirtish Shrotriya

एक ऐसा साल जिसने डराया भी और सिखाया भी — क्या मुश्किल वक़्त भी कभी शुक्रिया कहने लायक हो सकता है? 2020 को दिया गया एक भावुक धन्यवाद।


शुक्रिया-ए-2020 जिंदगी की कीमत समझाने के लिए।

शुक्रिया-ए-2020 जीने का सही मतलब समझाने के लिए।


हाँ माना तुम थोड़े ज्यादा निर्दयी, निष्ठुर और क्रूर थे।

पर हमे जीवन के सही मायने सिखाने को मजबूर थे।


इस बात को बताया तुमने की हम अब तक कितने भ्रम में थे।

अभी जीने को बहुत लंबी जिंदगी है इस वहम में थे।


जब चार दिवारी में बैठ कर कुछ महीने बिताने लगे।

अपनों के साथ रहने की ख़ुशी तभी समझ पाने लगे।


शुद्ध और ताज़ी हवा से हमे रूबरू भी कराया तुमने।

हमने पर्यावरण बर्बाद कर रखा था, महसूस भी कराया तुमने।


तुमने यह भी समझाया कि हम कम में भी गुजारा कर सकते है।

फ़िज़ूल के दिखावें से अच्छा तो किसी इंसा का पेट भर सकते है।


हमारे अंदर छुपी कलाओं को निखारा है तुमने।

कही शेफ़, कही सिंगर, तो कही पेंटर निकाला है तुमने।


रामायण महाभारत का इतिहास फिर से दिखाया है तुमने।

होली से न्यू ईयर तक सारे त्यौहारों को घर पर मनवाया है तुमने।


छोटी छोटी खुशियों की हमें अहमियत समझाने के लिए।

लॉक डाउन के बहाने ही अपनों के साथ थोड़ा वक्त दिलाने के लिए।


शुक्रिया-ए-2020, हमारी जिंदगी में आने के लिए।

शुक्रिया-ए-2020 जिंदगी की कीमत समझाने के लिए।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Sunday, April 22, 2018

Maine Waqt Badalte Dekha Hai – Life Truth Kavita | Kirtish Shrotriya

पैसों की चमक में सच्चे रिश्ते और वफ़ा भी बिक जाते हैं देखा है। वक़्त की बदलती चाल पर एक गहरी और सच्ची कविता।


मेने तूफानों को साहिलो पर ठहरते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने दिन के उजालो को, रात के अँधेरे में बदलते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने हर दिल अजीज़ लोगो को भी, एक पलभर में बिछड़ते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


चंद रुपयों के लालच में, अपनों को अपनों से झगड़ते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखे है..


एक सत्ता की कुर्सी के आगे, अच्छे अच्छों का ईमान सड़क पर बिकते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


बाज़ारो में बड़ी बड़ी साख़ रखने वालो को, पल में राख़ होते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


अपनी दौलत पर गुरुर करने वाले को भी एक दिन, पाई पाई का मोहताज होते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने सच्ची मोहब्बत को भी, दौलत के तराज़ू में तोलते हुए देखा है.. 

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने तूफानों को साहिलो पर ठहरते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..

हाँ मेने इस छोटे से वक़्त में बहुत कुछ देखा है.. !!


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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