Sunday, April 22, 2018

Maine Waqt Badalte Dekha hai



मेने तूफानों को साहिलो पर ठहरते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने दिन के उजालो को, रात के अँधेरे में बदलते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने हर दिल अजीज़ लोगो को भी, एक पलभर में बिछड़ते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


चंद रुपयों के लालच में, अपनों को अपनों से झगड़ते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखे है..


एक सत्ता की कुर्सी के आगे, अच्छे अच्छों का ईमान सड़क पर बिकते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


बाज़ारो में बड़ी बड़ी साख़ रखने वालो को, पल में राख़ होते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


अपनी दौलत पर गुरुर करने वाले को भी एक दिन, पाई पाई का मोहताज होते हुए देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने सच्ची मोहब्बत को भी, दौलत के तराज़ू में तोलते हुए देखा है.. 

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..


मेने तूफानों को साहिलो पर ठहरते देखा है..

हाँ मेने वक़्त को बदलते हुए देखा है..

हाँ मेने इस छोटे से वक़्त में बहुत कुछ देखा है.. !!


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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