Saturday, March 14, 2020

Main 90's ka hun chhora

पुरानी पीढ़ी और नई पीढ़ी के फ़र्क को मज़ेदार अंदाज़ में बयां करती यह कविता आपको हंसने पर मजबूर कर देगी!


मैं 90's(नाइनटीस) का हूं छोरा,तू नई सदी की लड़की है,

मेरे अंधियारे जीवन में, तू बिजली सी कड़की है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है,


मैं सीधा सरल सा प्राणी हूं, तू फैशन गलियों की रानी है,

मैं खेलूं गिल्ली डंडा, तू पब्जी टिक टॉक की दीवानी है,

तुझको करनी दिनभर शॉपिंग, और अपनी हालत कड़की है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


मैं रेलवेज में करता सफर, तू एयरप्लेन में उड़ती है,

मेरे कपड़ों से तो छोटी, तेरी जींस और कुर्ती है,

मैं नजरों में शरम रखूं, पर तुझ में लाज ना दिखती है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


तू नेटफ्लिक्स को देखे हैं, मैं DD1 पर अटका हूं,

तू स्नैपचैट को यूज करें, मैं फेसबुक पर लटका हूं,

मैं बोलूं हिंदी की भाषा, तू अंग्रेजी पर मरती है

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


मैं पंखे में ही सो जाऊं, तू एसी की डिमांड करें,

मैं पहनूं लोकल से कपड़े, तू सिर्फ ब्रांड की बात करें,

मैं खाऊं घर की दाल चपाती, तू पिज्जा बर्गर को तड़पी है,

मैं 90's का हूं छोरा, तू नई सदी की लड़की है ।।


                                                     ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Thursday, October 10, 2019

Na jane Kidhar hun mai

कभी अपनों की नज़रों में ही गुम हो जाना पड़ता है। खुद की पहचान खोजते एक अकेले दिल की गहरी उलझन।


कई अरसे से ढूंढ रहा हूँ शख़्सियत अपनी,

ना जाने इस वक़्त मैं कौन से शहर में हूँ ,


मैं अपनी ही सोच के अगर-मगर में हूँ,

शायद मैं एक दुनिया से दूसरी दुनिया के सफर में हूँ,


जिसे सुन कर भी अनसुना नहीं कर पाते है लोग अक्सर,

आज तो मैं उसी अनचाही सी खबर में हूँ,


कल तक खटकता था तिनका बन कर जिनकी आँखों में मैं,

देखो आज में उन सभी लोगो की नज़र में हूँ,


कोई बुझा दो रात के इन जलते चिरागों को जा कर,

आज मैं अपनी नई जिंदगी की, नई सहर में  हूँ,


अब तक लगता था मुझे दुश्मनों के दिमाग में है घर मेरा,

अपने दोस्तों के तो में हमेशा से जिगर में हूँ,


बहुत अँधेरा सा दिखाई दे रहा है मुझे चारो तरफ अपने,

अरे लगता है, मैं अपने ही लोगो की खोदी हुई कबर में हूँ ।।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Tuesday, July 30, 2019

Khud Se Mohabbat

खुद से प्यार करना दुनिया का सबसे मुश्किल पर सबसे ज़रूरी काम है। सेल्फ-लव पर एक प्यारी और दिल छू लेने वाली कविता।


कितना आसान है ना, खुद से मोहब्बत कर लेना 


खुद से ही लड़ना,झगड़ना, खुद ही में रो देना,

खुद से ही मिलना, बिछड़ना और खुद ही को खो देना,

खुद ही को देकर के तोहफे, खुद ही मैं खुश हो लेना, 

कितना आसान है ना, खुद से मोहब्बत कर लेना ।।


खुद ही को लेकर तन्हाई में, यूँ सड़कों पर चल लेना,

देकर हजारों मुसीबतें खुद को, खुद ही को उसका हल देना,

खुद को ही खो कर हर रात, हर सुबह खुद को ही पा लेना,

 कितना आसान है ना, खुद से मोहब्बत कर लेना ।।


खुद की ही हथेली पर, लिख कर नाम खुद का, खुद ही से पढ़ लेना,

खुद की ही खुशियों की खातिर, सारी दुनिया से लड़ लेना,

खुद ही पर मर गए हर पल, खुद के लिए ही जी लेना,

कितना आसान है ना, खुद से मोहब्बत कर लेना ।।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Monday, April 15, 2019

Ye Rasta Mujhse Baat Karta Hai

क्या सफ़र के रास्ते भी हमसे बातें करते हैं? ज़िंदगी की सीख को सफ़र के हर मोड़ में ढूंढती एक ख़ूबसूरत कविता।


मैं जब चलता हूँ, ये चाँद मेरे साथ चलता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


दुनिया जहां की सारी बंदिशों से, ये मेरे मन को आज़ाद करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये सिखाता है मुझे, की इन रास्तों की तरह, जीवन का पथ भी आसान नहीं है,

और गिरेगा तू लड़खड़ा कर, जो आगे तेरा ध्यान नहीं है,

इसी तरह बातों ही बातों में, हर बार मेरा ख्याल करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये हर दिन मिलता मुझे नए अजनबियों से, हर पल उन्हें पीछे छोड़ देता है,

और कुछ इस तरह ये मेरे जीवन को, हर पल एक नया मोड़ देता है,

फिर हर नई सुबह, एक नई किरण के साथ एक नया आगाज करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये बताता है मुझे, की सबके जीवन में मुश्किलों के रेड सिग्नल्स आते है,

और डट कर खड़े रहे कुछ देर उनके आगे, तो कुछ पल में वो भी ग्रीन हो जाते है ,

इसी तरह के नुस्खों से ये मेरे जीवन को साकार करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये कहता है मुझे, की जिंदगी की तरह सफर में भी, सुरक्षा का इंतज़ाम जरूरी होता है,

और कोई करे या ना करे, पर हर पल तुम्हरी माँ को, तुम्हारा इंतज़ार जरूर होता है,

इसी तरह, सारी मुसीबतों से रक्षा ये मेरी हर बार करता है,

मैं जहाँ भी जाता हूँ, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


ये कहता है मुझे, की करी जो बस मंज़िलो की परवाह तुमने, तो ये रास्ता पीछे छूट जाएगा,

और की जो बस कल की चिंता जो तुमने, तो तुम्हारा आज भी तुमसे रूठ जाएगा,

ऐसी ही अच्छी-अच्छी बातें, ये मुझसे दिन रात करता है,

बड़ा मजा आता है मुझे, जब ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


मैं जब चलता हूँ, ये चाँद मेरे साथ चलता है,

मुझे अक्सर लगता है, ये रास्ता मुझसे बात करता है ।।


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Saturday, January 12, 2019

Ye Kaun Sa Desh Hain

जहाँ स्त्री को देवी माना जाता है, वहीं उसकी सुरक्षा पर सवाल क्यों उठते हैं? महिला सुरक्षा पर एक तीखा और ज़रूरी सवाल।



महिलाओं पर जहाँ अत्याचार तुम दिन रात करते हो।

ये कौन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


जिन नो दिनों में देवी मान कर पूजते हो जिसे, 

उन दिनों में भी अपनी गन्दी नज़रों से उसका शिकार करते हो।

ये कौन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


रात को घर से निकलने से जहाँ डरती है औरते,

वहाँ उनके पहनावे मात्र से ही उनके करैक्टर पर सवाल करते हो।

ये कौन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


जहाँ श्री कृष्ण ने प्रेम की पवित्रता का वर्णन किआ है, 

वहाँ तुम अपनी गंदी वासनाओ को भी प्रेम का नाम देते हो।

ये कौंन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


नन्हीं सी बच्ची जो लक्ष्मी और सरस्वती का रूप मानी जाती है, 

उसकी मासूमियत से भी तुम इस तरह खिलवाड़ करते हो।

ये कौंन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।


औरत जहाँ शांति और समृद्धि का प्रतिक मानी जाती है,

फिर क्यों उन्हें घिनौनी हरकत कर बेबस और लाचार करते हो।

ये कौंन सा देश है जिसके उत्थान की तुम बात करते हो।।

                                                         

                                                        ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Thursday, September 6, 2018

Sirf Uske Ho Jayenge

जब भी कोई पूछे शादी कब करोगे, तो दिल में बस एक ही जवाब होता है — किसी का इंतज़ार। सच्चे प्यार के सपने बुनती एक रूमानी कविता।


जिंदगी की दौड़ में अकेले चलते-चलते, जब हम भी थक कर टूट जाएंगे ,

तब कहीं किसी मोड़ पर रुक, किसी हसीन चेहरे को देख हम भी मुस्कुराएंगे,


हम भी चुपके से उसका हाथ थाम, सात जनम साथ बिताने की कसमे खाएंगे,

हम भी दुनिया की भीड़ से कहीं दूर जा, उसके साथ ख्वाबों के पेंच लड़ाएंगे,


हम भी किन्ही वादियों के बिच उसके साथ, वो फिल्मी नग़मे गुन-गुनाएंगे,

फिर कभी छोटी-मोटी नोक झोक में, कभी उनसे रूठेंगे तो कभी उन्हें मनाएंगे..

 

अरे, हम भी तो कभी उनकी नशीली आँखों में आँख डाल, उस नशे में झूम जाएंगे,

हम भी जिसको शोना बाबू बेबी कह कर, प्यार से यूँ बुलायेंगे,


जिसके काँधे पर सर रख कर, हम रात भर बतियाएंगे,

गोद में जिसके रख कर सर, हम भी चैन से सो जाएंगे,


हम भी जिसकी खातिर, सारी दुनिया से लड़ जाएंगे,

हाथ थम कर हम भी जिसका, कदमों से कदम मिलायेंगे,


जिसके नाम को दिल में रख कर, प्यार का अलख जगाएंगे, 

फिर हम भी इश्क़ की हद में बढ़ कर, उसके और सिर्फ उसके हो कर ही रह जाएंगे,

जब जिंदगी की दौड़ में चलते-चलते, जब हम भी थक कर,, टूट जाएंगे,,,,


                                                                                         ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Friday, August 10, 2018

Desh Ka Batwara

धर्म, जाति और वोट बैंक की राजनीति ने देश को कितना बांटा है? स्वतंत्रता दिवस पर लिखी एक ओजस्वी और तीखी देशभक्ति कविता।


राजनीती के तुष्टिकरण में, देश को मेरे बाँटा है, 

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, नेताओ को जाता है,


वोट बैंक की राजनीती कर, जाती प्रान्त में बाँट दिया,

फिर भी शांति नहीं मिली तो, हिन्दू और मुस्लिम बाँट दिया,

ऊंच - निचे के भेद भाव में, आरक्षण ला कर लगा दिया,

और जिसने ऊँची आवज़ उठायी, उसे पैसो से दबाया जाता है,

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, नेताओ को जाता है,


जब बटवारे थे शुरू किये, रंगो तक को इनने बाँट दिया,

हिन्दी - उर्दू भी अलग हुई, गीता - कुरान भी बाँट दिया,

सोने की चिड़िया था ये, इसे सीमाओं में छाट दिया,

छोटे - छोटे टुकड़े कर के, भारत माँ तक को इनने बाँटा है ,

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, नेताओ को जाता है,


अंग्रेजी शिक्षा को लाकर, देसी संस्कारों को बाँट दिया,

सत्ता कुर्सी के भूके ऐसे, की अपने अपनों मार दिया,

चन्द वोट के लालच में, गौ माता तक को काट दिया ,

भ्रस्टाचारी और घूसखोरी, जिनको बड़ा लुभाता है,

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, उन नेताओ को जाता है,


सिंहासन के खातिर , ना जाने कितनो को मरवा दिया,

प्रेम मिटा कर इंसा में, हिंसा को बड़वा दिया ,

गिरा के मंदिर मस्जिद को, दंगो को भड़का दिया ,

और १ कुर्सी के लालच में, ना जाने कितने शिशो को इन्होंने काटा है ,

मेरे देश के बंटवारे का श्रेय, उन गद्दारो को जाता है..

मेरे देश के बटवारे का श्रेय, उन नेताओ को जाता है..


                                               ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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सभी भारत वासियों को स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम शुभकामनायें ,   जय हिन्द..!!


Wednesday, July 25, 2018

2 Dino ka Desh Prem

क्या हमारा देशप्रेम सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी तक ही सीमित है? तिरंगे के सम्मान पर एक करारा और सोचने पर मजबूर करने वाला सवाल।

चंद पंक्तियाँ देश के नाम, उस तिरंगे के नाम जिसे बस साल में २ बार याद किया जाता है ,
जो १५ अगस्त और २६ जनवरी को हर साल देश की आन बान शान में हमेशा लहराता है 
 पर फिर अगले ही दिन सड़को पर धूल खाता पाया जाता है..

  

फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आएगा.. 

चलो कुछ दिन बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा..


२६ जनवरी की शाम को बंद कर के जहा रखा था झंडा,

उन  डब्बो से धूल हटाया जाएगा ..

साल में २ दिन ही सही पर वो तिरंगा फिर से बाहर निकाला जाएगा..

जब हर चौक चौराहे पर तिरंगा फेहराया जाएगा

फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आएगा..

चलो कुछ दिन बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा..


बड़-चढ़ कर फेसबुक-व्हाट्सप्प पर पोस्ट लगाया जाएगा..

फिर से एक दिन देश के नाम राष्ट्रगान गया जाएगा..

जब देश प्रेम के गीतों को हर जगह सुनाया जाएगा..

मगर क्या देश पर दी कुरबनी को कोई याद भी करने जाएगा..?

हाँ पर १ दिन और घूमने को लोगो का प्लान जरूर बन जाएगा..

चलो कुछ दिनों क बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा..

फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आ जाएगा.


जब बच्चा बच्चा हाथ में झंडा ले कर विद्यालय तक जाएगा 

पर वही झंडा जब अगले दिन सड़को पर धूल खता पाया जाएगा.

जब कूड़ा बन कर गलियों में पेरो से कुचला जाएगा,

फिर शर्मसार हो कर के डब्बो में बंद हो जाएगा..

चलो कुछ दिनों क बाद फिर से स्वतंत्रता दिवस आएगा..

फिर से कुछ लोगो को अपना देश प्रेम याद आ जाएगा..


                                                           ~ किर्तिश श्रोत्रिय



आइये हम सब ये प्रण ले की अब से हमारे प्यारे तिरंगे को सड़को पर कचरे की तरह न फेके 
और दिल से उसका सम्मान करे .
जय हिन्द..!!


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