Tuesday, October 20, 2026

Ishq Se Ibadat Tak – Hindi Muktak Mala | Kirtish Shrotriya

कुछ रास्ते मंज़िलों के मोहताज नहीं होते; वहाँ सिर्फ़ दिल से उतरना ही काफ़ी होता है। हार में छुपे जीत के मज़े से लेकर वफ़ा के सजदे तक, चार मुक्तकों में पिरोया हुआ एक रूहानी तराना।

Ishq Se Ibadat Tak Hindi Muktak Mala by Kirtish Shrotriya


दिल की राहों में आकर ज़रा देखिए,
सब से नज़रें चुराकर ज़रा देखिए।
हार में ही छुपा है मज़ा जीत का,
इश्क़ में सब लुटाकर ज़रा देखिए!


राज़ अपने बताकर ज़रा देखिए,
ख़्वाब दिल में सजाकर ज़रा देखिए।
फीकी चाय भी शरबत सी हो जाएगी,
आँख उनसे मिलाकर ज़रा देखिए!


ज़ख़्म अपने छुपाकर ज़रा देखिए,
दर्द में मुस्कुराकर ज़रा देखिए।
ठोकरें खा के भी कैसे जीते हैं लोग—
इश्क़ में चोट खाकर ज़रा देखिए!


दिल में उनको बसाकर ज़रा देखिए,
सोई धड़कन जगाकर ज़रा देखिए।
ज़िंदगी इक इबादत में ढल जाएगी—
सर वफ़ा में झुकाकर ज़रा देखिए!

                 

                   ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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