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Tuesday, August 18, 2026

Naya Ishq – Hindi Ishq Ghazal | Kirtish Shrotriya

कहते हैं जब किसी से सच्चा इश्क़ होता है, तो सबसे पहले हमारी मुस्कुराहटें ही हमारा राज़ खोल देती हैं। यह ग़ज़ल उसी एहसास का जश्न है, जब किसी के आने से चाँद पहले से ज़्यादा खूबसूरत, और ज़िंदगी पहले से ज़्यादा रोशन लगने लगती है..

Naya Ishq Hindi Ishq Ghazal by Kirtish Shrotriya


ये मेरी आँखों का धोखा है, या तेरा इश्क़ चढ़ने लगा है,
न जाने क्यों ये चाँद... अब पहले से बेहतर लगने लगा है।


अधूरी सी चल रही थी जो कहानी मेरी अब तक,
तेरे आने से उसके मुकम्मल होने का, यक़ीं जगने लगा है।


डगमगा रही थी जो कश्ती मेरे इस सफ़र की,
तुम्हारी आहट से ही... उसे किनारा दिखने लगा है।


एक अरसे से ख़ामोश पड़ा था मेरे सीने में जो,
वो दिल अब तेरे नाम से... फिर धड़कने लगा है।


रोशनी तो पहले भी थी, ज़िंदगी के इन कमरों में,
पर तुम्हारी मौजूदगी से... अब उजालों को मतलब मिलने लगा है।


कल तक बेपरवाह सा फिरता था जो शख़्स ज़माने में,
तेरी फ़िक्र में पड़कर... अब वो भी ख़ुद को बदलने लगा है।


मुस्कुराहट तो वैसे हमेशा से थी 'श्रोत्रिय' के होंठों पर,
पर सच कहूँ... आजकल ये चेहरा कुछ ज़्यादा ही खिलने लगा है।


   

                                                                   ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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Tuesday, August 4, 2026

Aakhri Udaan – Hindi Ghazal on Silent Love

क्या मोहब्बत में कुछ सवाल ऐसे होते हैं, जिनका जवाब देने की नहीं — बस महसूस करने की ज़रूरत होती है? ये ग़ज़ल उन सब के लिए है जो किसी के इंतज़ार में बैठे हैं, और सोचते हैं कि बिना कहे भी सामने वाला सब समझ जाएगा। मैंने भी कुछ ऐसे ही सवाल किए हैं, सुनिएगा कि जवाब में क्या मिलता है— पहचान से लेकर आख़िरी उड़ान तक।

Aakhri Udaan Hindi Ghazal by Kirtish Shrotriya


गर कह दूं कि इश्क हुआ है, तो क्या मान लोगे, 

मेरी आँखों में देखोगे उसे, तो क्या पहचान लोगे।


हमने तो सौंप दी, हर धड़कन तुम्हारे हाथ में, 

अब क्या और मेरी वफ़ा का इम्तेहान लोगे?


तुम्हारी एक नज़र ही काफी है क़त्ल करने को,

फिर क्यों पलकें झुका कर यूँ मेरी जान लोगे?


कभी तो बिना कहे भी समझो मेरी खामोशी को, 

या हर बार 'इज़हार' के लिए मेरी ही ज़ुबान लोगे?


दीन, दुनिया, उसूल... सब छोड़ बैठे हैं तेरे इश्क़ में, 

क्या अब इस बंदे का बचा-खुचा ईमान लोगे?


आँसू तो पहले ही दे चुके हो तुम इन आँखों को, 

अब क्या मेरे होंठों की ये बची हुई मुस्कान लोगे?


पंख तो पहले ही कतर चुके हो 'श्रोत्रिय' के तुम, 

क्या अब इस तड़पते परिंदे की आखिरी उड़ान लोगे?


                                   

                                                     ~ किर्तिश श्रोत्रिय




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