Showing posts with label Simplicity Shayari. Show all posts
Showing posts with label Simplicity Shayari. Show all posts

Tuesday, May 19, 2026

Ghar Achha Lagta Hai – Sadagi Kavita | Kirtish Shrotriya

न पहाड़ों में सुकून, न समंदर में दिल — फिर भी अगर कहीं चैन मिलता है, तो अपने ही घर में। सादगी और अपनेपन की एक दिलचस्प कविता।

Ghar Achha Lagta Hai Hindi Kavita by Kirtish Shrotriya

ना पहाड़ों में जी लगता है, 

ना समंदर में दिल लगता है

मैं औरों से थोड़ा अलग हूँ जनाब, 

मुझे बस अपना घर अच्छा लगता है।


जिंदगी की भीड़ में खुद को खोया नहीं मैंने,

मुझे अब भी अपना सफर अच्छा लगता है।


रात के अंधेरों में लिखता हूँ अक्सर,

मुझे बस मेरा हुनर अच्छा लगता है।


बातों में छुपी खामोशी को पहचान लेता हूँ,

मुझे तेरा जज़्बात इस कदर अच्छा लगता है।


जब से रखा है उसने मोहल्ले में पैर अपना,

तब से मुझे मेरा शहर अच्छा लगता है।


उसकी सहेलियों ने छुपकर बताया है मुझे,

उसे आज भी मेरा इश्क हर नज़र अच्छा लगता है।


तेरे जाने के बाद, अब तन्हाई में मुझे,

इस ज़माने में सिर्फ़ ज़हर अच्छा लगता है।


                                        ~ किर्तिश श्रोत्रिय





Don't forget to Like, comment and share with your friends and family.


© Kirtish Shrotriya. Unauthorized copying prohibited.